महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान (राज.), सेक्टर 3, विद्याधर नगर, जयपुर में स्थित एक समर्पित गैर-लाभकारी संस्था है, जो सामाजिक उत्थान, शैक्षणिक सहयोग और सामुदायिक एकता के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान का उद्देश्य महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है — जहाँ शिक्षा, समानता और न्याय केवल आदर्श नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग बनें।
संस्थान की नींव इस सोच पर रखी गई थी कि हर व्यक्ति को गरिमा से जीने और अवसरों तक पहुँच पाने का हक है। समाज के वंचित, निर्धन और पिछड़े वर्गों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सहयोग उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता रही है।
महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के सामाजिक संघर्ष और सेवा भाव से प्रेरित होकर, हम समाज में समान अवसर और शिक्षित नागरिकता का निर्माण करना चाहते हैं। हम मानते हैं कि "सच्ची शिक्षा वही है जो समाज को बेहतर बनाए" — और उसी भावना से हम कार्य करते हैं।
100% गैर-लाभकारी संस्था दानदाता, भामाशाह और समाजसेवियों का सक्रिय सहयोग पारदर्शिता और उत्तरदायित्व आधारित प्रशासन वर्षभर सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियाँ
छात्रों को उच्च शिक्षा में मार्गदर्शन प्रदान किया गया
प्रोजेक्ट्स ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े
छात्रावास व आवासीय सुविधा से लाभान्वित छात्र
छात्रों, शिक्षकों और समाजसेवियों की जुबानी — MJPRS से जुड़े अनुभव जो प्रेरणा भी हैं और प्रमाण भी। आपकी कहानी अगली हो सकती है!
छात्र, जयपुर
मैं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हूँ और उच्च शिक्षा का सपना बस सपना बनकर रह गया था। लेकिन MJPRS की छात्रवृत्ति योजना ने मुझे नई राह दी। आज मैं बी.एड. कर रहा हूँ और आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हूँ। यह संस्थान सचमुच बदलाव का प्रतीक है।
शिक्षिका, टोंक
MJPRS द्वारा आयोजित 'शिक्षिका सम्मान समारोह' में मुझे सम्मानित किया गया, जो मेरे लिए गर्व का क्षण था। इस संस्थान ने मुझे न केवल पहचान दी, बल्कि हौसला भी बढ़ाया। महिलाओं को आगे लाने का इनका प्रयास सराहनीय है।
सामाजिक कार्यकर्ता, सीकर
पहले मैं सोचता था कि समाज सेवा केवल बड़े लोग करते हैं। लेकिन MJPRS के रक्तदान शिविर में भाग लेकर मैंने जाना कि हर कोई किसी की जान बचा सकता है। यह संस्था युवाओं में सेवा-भाव भर रही है।
छात्रा, अजमेर
मैंने MJPRS के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया और महसूस किया कि यह सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। यहां आकर मुझे अपने इतिहास, संस्कृति और समाज की गहराई से समझ मिली।
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